Sunday, 14 August 2022

लाल द्वीप - ९

 

९. सीलबंद बोतल

समुद्र की फेनिल लहरों ने उसे यूरोपीय किनारे पर उछाल दिया. बोतल को कार्बोलिक एसिड से अच्छी तरह धोया गया और, खुद लार्ड की उपस्थिति में, खोला गया. अन्दर से एक कागज़ निकला जिस पर  इथोपियन में लिखा गया था. अनुभवी अनुवादक ने मुश्किल से इस लिखाई को पढ़कर उसे ग्लिनर्वान को थमा दिया. ये मदद के लिए एक बदहवास गुहार थी. 

हम भूख से मर रहे हैं. छोटे-छोटे बच्चे मर रहे हैं. हैजा अभी भी तांडव मचा रहा है. क्या हम इंसान नहीं हैं? द्वीप पर डबल रोटी भेजिए! आपके, आपसे प्यार करने वाले इथोपियन्स.”

द्वीप से बोतल द्वारा भेजे गए सन्देश से रिकी-तकी-तवी गुस्से से हरा हो गया और चीखते हुए लार्ड के पास पहुँचा.

मेहेरबान लार्ड, खुदा के लिए! उन्हें वहां मर जाने दें! पहले तो उन्होंने विद्रोह करने की जुर्रत की, ऊपर से उन्हें ब्रेड भी दो...”

“मेरा ऐसा करने का कोइ इरादा नहीं है,” लार्ड ने ठंडेपन से विरोध किया और चाबुक से भूतपूर्व फ़ौजी कमांडर को टीले की चोटी पर घसीटता रहा, जिससे वह आगे से बिन मांगी सलाह देने की हिम्मत न करे.

“सच बात ये है कि ये बिलकुल सुअरपन है,” मिशेल अर्दान ने दबी जुबान से कहा, “कम से कम कुछ मक्का तो भेज सकते थे...”

“आपकी सलाह के लिए बहुत शुक्रगुज़ार हूँ. महाशय,” रूखेपन से लार्ड ने उसकी बात काटी, “मगर इसका पैसा मुझे कौन देगा? इसके बगैर भी मूरों का ये कचरा जल्दी ही हमारा आख़िरी निवाला भी खा जायेंगे. महाशय, मैं आपसे विनती करूंगा कि भविष्य ऐसी बेवकूफी भरी सलाह न दें.”

क्या आप ऐसा सोचते हैं, महाशय?” फ्रेंच व्यक्ति व्यंग्य से आंखें सिकोड़ते हुए कहता रहा, “उस हालत में मेहेरबानी करके आप मझे द्वंद्व युद्ध के लिए आपकी सुविधानुसार समय दें. मैं कसम खाता हूँ , प्रिय महाशय, कि बीस कदम की दूरी से मैं आपके कुलीन माथे में उतनी ही सफाई से गोली घुसा दूँगा, जैसे ‘नोत्र दाम कैथेड्रल’ में.”

“अफसोस है, महाशय, कि मैं आपको मुबारकबाद नहीं दे सकता, अगर आप मुझसे बीस कदम की दूरी पर होंगे,” लार्ड ने जवाब दिया, “क्योंकि तब आपका वज़न उस गोली जितना बढ़ जाएगा, जो मैं आपकी आंख में घुसाने पर मजबूर हो जाऊंगा.” 

द्वंद्व युद्ध के लिए लार्ड का गवाह बना सर फिलियास फोग, अर्दान का गवाह – प्रोफ़ेसर पगानेल. अंत में अर्दान का वज़न अपरिवर्तित रहा. अर्दान का निशाना लार्ड की अपेक्षा अधिक परिणामकारी था. सिर्फ उसने लार्ड को नहीं, बल्कि एक मूर को चकित किया. मूर आसपास की झाड़ियों में छुपकर बैठ गए और उत्सुकता से दो कुलीन आदमियों के द्वंद्व युद्ध को देखने लगे. अर्दान की गोली इन्हीं  उत्सुक दर्शकों में से एक की आँखों के बीचोंबीच घुस गई. गरीब बेचारे के प्राण पखेरू होश में आये बगैर उड गए.  

मिशेल अर्दान और लार्ड ग्लिनर्वान ने एक दूसरे से हाथ मिलाया और दोनों जेंटलमेन गरिमा के साथ एक दूसरे से बिदा हुए. 

और द्वंद्व युद्ध के शिकार को वहीं झाड़ियों में दफ़न कर दिया गया.

इस तरह यह नाटकीय द्वंद्व-युद्ध संपन्न हुआ, मगर सीलबंद बोतल का मामला अप्रत्याशित रूप से आगे बढ़ता रहा. पता चला, कि पत्थर तोड़ने वालों में से सभी रिकी-टिकी-तवी के नज़रिए से सहमत नहीं थे. उन्हीं में कुछ उपद्रव फैलाने वाले भी थे, जिन्होंने लाल-द्वीप के सन्देश को किसी और ही तरह से समझा. अगली ही रात को पचास मूरों ने खदान से साहसी पलायन किया, डोंगी में बैठे और लार्ड के नाम बेहद अशिष्ठता भरा सन्देश छोड़कर उन्होंने यूरोपीय किनारे को छोड़ दिया:

“ आप सबको धन्यवाद देते हैं कार्बोलिक-हम्माम के लिए और भैंसों की नसों के कोड़ों वाले संवेदनशील           

 उस्तादों के लिए. और तू, बुर्झुआ, नासपीटा लार्ड, हमारे हाथों में फिर से आयेगा, और तब, हम इस तरह से तेरा शुक्रिया अदा नहीं करेंगे. हम तेरी टांगों को उखाड़कर फेंक देंगे! और अभी हम अपने द्वीप वापस जा रहे हैं, इथोपियन्स के साथ शान्ति और भाईचारा बनाने के लिए. तेरे सडे हुए मकई-गोमांस से बेहतर है अपनी मातृभूमि में हैजे से दम तोड़ना. सबका सलाम – मूर”.

यूरोपीय किनारे से भागते हुए मूर अपने साथ दूरबीन, टूटी हुई मशीनगन, गाढे दूध के सौ डिब्बे, पहले से ही तोड कर निकाले गए दरवाजों के छह चमचमाते हैंडल्स, दस रिवॉल्वर और दो गोरी औरतें ले गए.

लार्ड ग्लिनर्वान ने सभी बचे हुए मूरों को कोड़े लगाने का हुक्म दिया और अपनी नोट बुक में भगोड़ों द्वारा चुराई गई चीज़ों का सही-सही मूल्य लिख लिया.

Tuesday, 9 August 2022

लाल द्वीप - ८

 

 

८. मृत द्वीप


सभी जहाज़ों को सख्त आदेश मिला – द्वीप के नज़दीक न जाएँ, जिसे क्वारंटाइन क्षेत्र घोषित किया गया था. कैप्टन सख्ती से इस निषेध का पालन करते थे. दूर से, रात को कभी-कभी द्वीप से टिमटिमाती रोशनी दिखाई देती, और दिन में हवा के तेज़ झोंके कभी-कभी काला धुआँ और निरंतर बदबू लाते. लाशों की सडान नीली लहरों पर तैरती रहती.

“हाँ, द्वीप ख़त्म हो चुका है,” कभी धरती के इस प्यारे टुकडे के लुभावने हरे किनारों की ओर दूरबीन से, देखते हुए नाविक आपस में कहते.

द्वीप की परिस्थिति के बारे में खबरें मूरों तक भी पहुँची. लार्ड के टुकड़ों पर पल रहे, कमजोर परछाइयां बन चुके, वे पत्थर तोड़ने के काम पर चलते हुए नहीं, बल्कि घिसटते हुए जाते थे. मगर अब लाल द्वीप की त्रासदी की हर नई खबर उनमें एक दुष्ट शक्ति का संचार कर रही थी.  

“ उन कमीनों के साथ ऐसा ही होना चाहिए! खुदा करे कि वे, इथोपियन जानवर, एक-एक करके सब मर जाएँ! और जब वे ख़त्म हो जायेंगे, तब हम फिर से वापस लौट जायेंगे और अपने द्वीप पर अधिकार कर लेंगे. और जैसे ही इस चालाक कोकू-कोकी को पकड़ेंगे, अपने हाथों से उसकी एक-एक आंत बाहर निकाल देंगे....”

लार्ड ग्लिनर्वान बेरहमी से अपनी खामोशी बनाए रखता.

Monday, 8 August 2022

लाल द्वीप - ७

 

७. आप्रवासियों की पीड़ा या सज्जनों जैसा आतिथ्य


कोई भी कलम उन अनगिनत पीडाओं का वर्णन नहीं कर सकती, जो कुलीन लार्ड के अतिथी के रूप में अभागे मूरों ने सही थीं. क्या-क्या तो उन्होंने नहीं सहा! आप्रवासी क्वारंटाइन में उन्हें, सबसे पहले, सिर से पाँव तक कार्बोलिक एसिड के गाढ़े घोल से धोया गया. ज़िंदगी की अंतिम सांस तक उनमें से कोई  भी इस कार्बोलिक एसिड के हम्माम को नहीं भूल पाया! इसके बाद उन सबको किसी बागड लगे हुए मैदान में खदेड़ा गया, जो गधों के बाड़े की याद दिलाता था, जहाँ ये अभागे बेहद लम्बे समय तक रहे. क्वारंटाइन के अधिकारियों को अच्छी तरह से समझा दिया गया कि अभागे भगोड़ों को उतना ही राशन दिया जाए कि वे भूख से न मर जाएँ. मगर चूंकि इस नियम के अनुसार एकदम सही मात्रा का निर्धारण करना संभव नहीं था (ऊपर से क्वारंटाइन में मौजूद हर कामगार के अपने रिश्तेदार और परिचित भी थे), तो क्या इस बात से आश्चर्यचकित हुआ जा सकता है कि मूरों का करीब एक चौथाई भाग खुदा को प्यारा हो गया. 

आखिरकार, जब यह तय किया गया कि क्वारंटाइन बाड़े में आप्रवासियों को पर्याप्त मात्रा में निर्जन्तुक कर दिया गया है, तो लार्ड ग्लिनर्वान उतनी ही गंभीरता से उनके काम के बारे में प्रयास करने लगा.

“मुफ्त में तो ये टोली हमारी रोटी नहीं खायेगी,” वह भुनभुनाया और क्वारंटाइन के बाद जीवित बचे सभी मूरों को नई खुली ग्रेनाईट की खदान में पत्थर तोड़ने के लिए भेज दिया. यहाँ वे भैंसों की नसों से बुने कोड़ों से लैस अनुभवी निरीक्षकों की देखरेख में मेहनत करते, अपने कौशल को निखारते.

Saturday, 6 August 2022

लाल द्वीप - ६

 

 

भाग -२

द्वीप अग्नि ज्वालाओं में


६. रहस्यमय डोंगी


कुछ दिन और बीते. और अचानक – जब पौ फट ही रही थी – यूरोपियन किनारे पर तैनात संतरियों ने सुबह के झुटपुटे में कोई संदेहास्पद गतिविधि देखी और अलार्म-सिग्नल भेजा:

“क्षितिज पर अनजान जहाज़!”  

“लोंर्ड ग्लिनर्वान ने दूरबीन लगाई और, सबके साथ किनारे पर आकर बड़ी देर तक निकट आते हुए काले धब्बों को देखता रहा.

“समझ में नहीं आ रहा है,” आखिरकार जेंटलमेन ने कहा, “मगर ऐसा लगता है कि यह जंगलियों की डोंगियाँ हैं.”

“कडकडाहट और बिजली,” अपनी दूरबीन नीचे करते हुए मिशेल अर्दान चहका. “वाशिंगटन डॉलर के मुकाबले सन् १९२३ के खस्ताहाल रूबल की शर्त लगाता हूँ कि ये मूर हैं!”

“हाँ, ऐसा ही है,” प्रोफ़ेसर पगानेल ने पुष्टि की.

जब डोंगियाँ किनारे के पास आईं, तो पता चला कि अर्दान और पगानेल सही थे.

“इस सबका क्या मतलब है?” ज़िंदगी में पहली बार चरम आश्चर्य का अनुभव करते हुए कुलीन लार्ड ने किनारे पर उतरे नाविकों से पूछा.       

जवाब देने के बदले अप्रत्याशित आगंतुक फूट-फूटकर रोने लगे. उनकी हालत इतनी बुरी थी कि देखने से दया आती थी. जब मूर कुछ होश में आये और उन्होंने अपने आप को संभाला, वे कुछ कहने की स्थिति में आये.

टूटे-फूटे, असंबद्ध शब्दों की इस दास्तान से लाल द्वीप की घटनाओं की डरावनी तस्वीर सामने आई. इथोपियन्स के झुण्ड...घिनौने उकसाने वालों ने इन्हें भड़काया और उन पर अत्याचार करने लगे...शर्मनाक मांगें : सभी मूरों को – जहन्नुम में! ...रिकी-टिकी-तवी का सुसज्जित दंडात्मक अभियान चूर-चूर हो गया...धूर्त कोकू-कोकी अपनी व्यक्तिगत डोंगी पर सबसे पहले भाग गया...दंडात्मक अभियान का बचा-खुचा भाग रिकी-टिकी-तवी के नेतृत्व में, अपनी ज़िंदगी बचाने के लिए, इन जर्जर नौकाओं पर सवार होने को बाध्य हुआ. उन्होंने महासागर पार किया और अपने पुराने परिचित – लॉर्ड के पास शरण माँगने आये.         

“एक सौ चालीस शैतान और एक चुड़ैल!” अर्दान ने ठहाका लगाया. “वे यूरोप में छुपना चाहते हैं...ऐसा ही लगता है – आँ?

“और इस पूरी फ़ौज को रखेगा कौन और खिलाएगा कौन?” ग्लिनर्वान डर गया.
“नहीं
, नहीं, आपको अपने द्वीप लौट जाना चाहिए.”

“महामहिम, हम तो वहाँ अपनी नाक भी नहीं घुसा सकते,” मूर बिसूरने लगे, “इथोपियन्स हम सबको मार डालेंगे. और हमारी छत भी छिन गई है : हमारी विग्वाम राख और धुआँ बन गई हैं. अगर इस कचरे से निपटने के लिए द्वीप पर आपकी सशस्त्र फौजें भेजी जाएँ तो...”

“इस सुझाव के लिए आपका शुक्रिया,” लार्ड ने सूक्ष्म व्यंग्य से उनका प्रतिवाद किया. “बेवकूफ समझ रखा है क्या,” उसने ब्रीफ़केस से संवाददाता के टेलीग्राम वाला अखबार निकाल कर मूरों को दिखाया. “आपके यहां महामारी का तांडव हो रहा है, और आपके उस पूरे घटिया द्वीप के मुकाबले में मेरा एक-एक नाविक ज़्यादा कीमती है.”

“ओय, कितना सही कहा है आपने, महामहिम ,” नए आप्रवासी ग्लिनर्वान के सामने खूब गिडगिडाए. “सही है कि हम कौड़ी के लायक भी नहीं हैं. मगर जहाँ तक प्लेग का सवाल है, तो मिस्टर संवाददाता ने जैसा है, वैसा एकदम सही लिखा है. महामारी फ़ैल रही है और भूख भी...”

“अच्छा, अच्छा,” कुछ देर सोचने के बाद लार्ड ने कहा, “तो, क्या करें...अच्छी बात है, देखेंगे...” और उसने भगोड़ों को हुक्म दिया:

“ चलो, सब लोग, मार्च टू क्वारंटाइन!”


Wednesday, 3 August 2022

लाल द्वीप - ५

 ५. विद्रोह

इस बीच घटनाएं तेज़ी से आगे बढ़ती रहीं और, परिणाम स्वरूप द्वीप पर राजनीतिक परिस्थिति फिर से अत्यंत तनावपूर्ण हो गई. अपने शासन के पहले ही दिन कोकू-कोकी ने, इथोपियनों को खुश करने के लिए, उनके लाल रंग के सम्मान में, द्वीप का नाम बदल कर ‘लाल या किरमिजी द्वीप कर दिया. मगर इथोपियन्स इस गौरव के प्रति उदासीन रहे और उन पर इस नाम परिवर्तन का कोई प्रभाव न पडा, बल्कि इससे मूरों के बीच नाराज़गी फ़ैल गई.

दूसरे दिन कोकू-कोकी ने मूरों को खुश करने का फैसला किया और आधिकारिक रूप से उनमें से एक की, मतलब उसी रिकी-टिकी-तवी की, पुनर्स्थापित सुप्रीम कमांडर के पद पर नियुक्ति कर दी. मगर इससे वह मूरों को ज़रा भी खुश न कर सका, बल्कि उनके बीच ईर्ष्या और कलह उत्पन्न कर दिया, क्योंकि उनमें से हरेक इस पद को प्राप्त करना चाहता था. मगर इथोपियन समाज में एक मूर की पदोन्नति के समाचार से अप्रसन्नता फ़ैल गई.  

तब तीसरे दिन हमारे ‘हीरो ने खुद को खुश करने की ठानी और इस उद्देश्य से उसने खाली डिब्बों से एक नया मुकुट बनाया और उसे अपने सिर पर पहन लिया. मुकुट बहुत सुन्दर था और अविस्मरणीय सिसी-बुसी के शाही मुकुट से इतना मिलता-जुलता था जैसे पानी की दो बूंदें हों. मगर इस कारनामे का सभी ने विरोध किया : मूरों को यकीन था कि उनमें से शायद ही कोई ऐसे मुकुट के लायक था, और इथोपियन्स, जो प्रचुर मात्रा में अग्नि-जल के सेवन से हतोत्साहित हो चुके थे, इसमें फिर से राजतंत्र की बहाली को देख रहे थे. उनकी पीठों में यूँ ही सिर्फ इस एक याद से खुजली नहीं होने लगती थी, कि कैसे स्वर्गीय सिसी-बुसी, उसके प्रिय कथनानुसार, “उन्हें एक ही स्तर पर ले आया था.”  

फिर भी, जब तक अग्निजल पर्याप्त था, किसी भी तरह का विरोध या गुट गंभीरता से लीडर के अधिकार को चुनौती नहीं दे सकता था. याद कीजिये, कि जब द्वीपवासियों ने उसके प्रति वफादारी की शपथ ली थी, तब कोकू-कोकी ने समारोहपूर्वक नए शासन के कार्यक्रम के प्रमुख सिद्धांत की घोषणा की थी : “हरेक को ज़रुरत के मुताबिक़ अग्नि जल दिया जाएगा!” 

इसलिए कोकू-कोकी का प्रमुख तथा सर्वोच्च प्राथमिकता वाला काम था – तड़पते हुए लोगों के लिए अग्नि जल उपलब्ध करवाना. और यहीं वह असफल हो गया, क्योंकि घोषित कार्यक्रम को पूरा करने की स्थित में नहीं था. इसका कारण बड़ा मामूली था : अगर सभी अपनी आवश्यकता के अनुसार अग्नि जल प्राप्त कर सकते थे, तो ये आवश्यकताए दिन पर दिन बढ़ती ही गईं और लोग अतृप्त ही रहे, मगर अग्नि जल का भण्डार आये कहाँ से? बढ़ते हुए संकट से निकलने के लिए कोकू-कोकी ने साल भर की मक्के की फसल को अग्नि जल बनाने में इस्तेमाल करने का आदेश दे दिया. मगर यह भी ज़्यादा दिन नहीं चला और इस उपाय से इथोपियन्स के और मूरों के पेट को चोट पहुँची : फसल तो जल्दी से पी गए,  और अगर मूरों ने थोड़ी बहुत फसल बचा कर रखी थी, तो इथोपियन्स के पास न तो खाने के लिए कुछ बचा था, और न ही पीने के लिए, सिवाय बारिश के पानी और जंगली नारियल के. देश में सामान्य असंतोष बढ़ता जा रहा था और राजनीतिक परिस्थिति अपनी चरम सीमा तक पहुँच चुकी थी. शासक का दबदबा ख़त्म हो गया था और वह खुद भी अपने क्रुद्ध देशवासियों से बचने के लिए अपने विग्वाम में छुप जाता था, जहाँ पूरी निष्क्रियता से पडा रहता.        

और एक खूबसूरत दिन सुप्रीम सर्वोच्च कमांडर रिकी-टिकी-तवी के विग्वाम में अप्रत्याशित रूप से एक इथोपियन दूत प्रकट हुआ, किसी उकसाने वाले और कपटी की धूर्त आंखों वाला. इस समय कमांडर महत्वपूर्ण काम में व्यस्त था और वह किसी से मिलने की स्थिति में नहीं था: वह अग्नि जल पी रहा था और फ्राईड पोर्क को कुतर रहा था.        

“क्या चाहिए तुझे, इथोपियन थोबड़े?” अपने काम से हटकर उसने चिडचिडाहट से पूछा.

इथोपियन ने अपनी इस तारीफ़ को नज़र अंदाज़ कर दिया और सीधे मतलब की बात पर आ गया.

“तो, ये क्या बात हुई,” उसने अपनी शिकायतों का पुलिंदा खोला. “इस तरह से काम नहीं चल सकता. आपके लिए, मतलब, वोद्का और पोर्क, और हमारे लिए...इसका मतलब क्या हुआ – क्या फिर से पुराने ढर्रे पर?

“आह, ये बात है...तुझे भी, कहता है, पोर्क चाहिए?” उदासी से, मगर फिर भी स्वयँ पर नियंत्रण रखते हुए बूढ़े योद्धा ने पूछा.

“तो, और क्या? आखिर इथोपियन्स भी इंसान हैं!” इथोपियन प्रतिनिधि ने बेशर्मी से एक पैर से दूसरे पैर पर होते हुए, धृष्ठतापूर्वक जवाब दिया.  

पराक्रमी रिकी-टिकी-तवी इस बेशर्मी को और ज़्यादा बर्दाश्त न कर सका. शानदार योद्धा ने एक झटके में सूअर की टांग को पकड़ा, पीछे मुडा और पूरी ताकत से अभागे मेहमान के दांतों में उसे इस तरह घुसेड़ा कि चारों और की हर चीज़ उड़ने लगी : पोर्क से तेल का फव्वारा उछलकर चारों और उड़ा, इथोपियन के मुँह से – खून, और उसकी आंखों से आंसुओं के साथ हरी चिंगारियां बिखरने लगीं.

“भाग जा!” कमांडर भौंका और उसने बहस को ख़त्म कर दिया.

हम नहीं जानते कि उस बदनसीब इथोपियन उपद्रवी ने अपने लोगों के पास जाकर क्या किया, मगर यह बात अच्छी तरह मालूम है कि शाम होते-होते पूरा “लाल द्वीप” छेडी गई मधुमक्खियो के छत्ते की तरह भिनभिना उठा. और रात को पास से गुज़रते हुए युद्धपोत “चांसलर” पर अचानक दक्षिणी खाडी वाले भाग में दो स्थानों पर आग की लपटें दिखाई दीं. और युद्धपोत से हवा में रेडिओग्राम उड़ चला:

“द्वीप पर रोशनाई विराम शायद इथोपियन गधे फिर से बहक गए हैं विराम कैप्टेन हातेरस”.

अफसोस, बहादुर कप्तान गलती कर बैठा था. ये किसी त्यौहार की रोशनाई नहीं थी. ये विद्रोही इथोपियन्स के विग्वाम धू-धू करते हुए जल रहे थे, जिन्हें रिकी-टिकी-तवी के दंडात्मक दस्ते ने फूंक  दिया था.

सुबह तक ये अग्नि स्तम्भ धुएँ में बदल गए थे , और अब वे दो नहीं, बल्कि नौ हो गए थे. अगली रात को आग की बदहवास लपटें सोलह स्थानों पर चिंघाड़ रही थीं. पैरिस और लन्दन के, रोम और न्यूयॉर्क के, बर्लिन तथा अन्य शहरों के अखबार इन दिनों मोटी-मोटी, चिल्लाती हुई हेडलाइन्स से नमक-मिर्च लगा रहे थे:

“लाल-द्वीप पर आखिर हो क्या रहा है?

और फिर पूरी दुनिया उस दुर्दैवी टेलीग्राम से स्तब्ध रह गई, जो आखिरकार, अपनी कुशलता के लिए प्रसिद्ध “न्यूयॉर्क टाइम्स” के विशेष संवाददाता से प्राप्त हुआ था:

“आज छः दिनों से मूरों के विग्वाम जल रहे हैं विराम इथोपियन्स के बड़े-बड़े झुण्ड...(अस्पष्ट). धूर्त कोकू-कोकी ने कि...(आगे अस्पष्ट )”

और एक दिन बाद दुनिया एक सनसनीखेज़ टेलीग्राम से स्तब्ध रह गई, जो द्वीप से नहीं, बल्कि एक यूरोपियन बंदरगाह से आया था:

“इथोपियन्स ने भव्य विद्रोह कर दिया है विराम द्वीप जल रहा है विराम प्लेग की महामारी फ़ैल रही है विराम लाशों के पहाड़ विराम पाँच सौ एडवांस संवाददाता”.

खान का अग्निकांड

  खान का अग्निकांड लेखक: मिखाइल बुल्गाकव  अनुवाद: आ. चारुमति रामदास    जब सूरज चीड़ के पेड़ों के पीछे ढलने लगा और महल के सामने दयनीय, प्रक...